भारत-चीन मुलाकात 2025: नई दिशा की ओर बढ़ते रिश्ते

भारत-चीन मुलाकात 2025: नई दिशा की ओर बढ़ते रिश्ते

भारत-चीन मुलाकात 2025: नई दिशा की ओर बढ़ते रिश्ते

एशिया की दो बड़ी ताकतें — भारत और चीन — लंबे समय से सीमा विवाद और कूटनीतिक तनावों से गुज़र रही हैं। लेकिन 2025 में चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) के भारत दौरे ने रिश्तों में एक नई ऊर्जा भर दी है। यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह गलवान (2020) की झड़प के बाद की खटास को कम करने की दिशा में बड़ा कदम है।

वांग यी का भारत दौरा

अगस्त 2025 में चीन के विदेश मंत्री वांग यी नई दिल्ली पहुँचे। यहाँ उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। इस दौरान सीमा विवाद, आर्थिक सहयोग और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा हुई।

भारत-चीन मुलाकात 2025: नई दिशा की ओर बढ़ते रिश्ते

बातचीत के मुख्य मुद्दे

1. सीमा विवाद और शांति

वांग यी ने कहा कि “सीमा पर अब शांति है और दोनों देश अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ सकते हैं।”
भारत की ओर से साफ संदेश दिया गया कि सीमा पर स्थिरता ही द्विपक्षीय रिश्तों की बुनियाद है।

2. आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते

दोनों देशों ने व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

भारत ने वीज़ा प्रक्रिया सरल करने और निवेश में संतुलन पर जोर दिया।

लक्ष्य है कि दोनों देशों के बीच विश्वास और आर्थिक साझेदारी को मज़बूत किया जाए।

3. विश्वास बहाली

वांग यी ने कहा कि भारत और चीन एशिया की दो बड़ी शक्तियाँ हैं और उन्हें मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी माना कि आपसी सहयोग से एशिया में स्थिरता और वैश्विक शांति को बढ़ावा मिलेगा।

आगामी मुलाकात: SCO सम्मेलन

यह दौरा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है, जो चीन के तियानजिन शहर में होने वाला है।
संभावना है कि वहाँ प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने मिलेंगे।

निष्कर्ष

2025 की भारत-चीन मुलाकात रिश्तों में तनाव से संवाद की ओर बढ़ने का संकेत है।
सीमा विवाद अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है, लेकिन वांग यी का यह दौरा दोनों देशों के बीच नए भरोसे और सहयोग की शुरुआत माना जा रहा है।

👉 यह मुलाकात भारत-चीन रिश्तों को किस दिशा में ले जाएगी, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि संवाद के बिना समाधान संभव नहीं और 2025 की यह पहल उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।